"आपका पैसा वापस दिला देंगे" — दूसरी ठगी
जो एक बार ठगा जा चुका है, उसे दोबारा निशाना बनाया जाता है। यह अलग गिरोह नहीं होता — अक्सर वही लोग, या उन्हीं से ख़रीदी गई सूची। और यह पहली ठगी से ज़्यादा चोट पहुँचाता है, क्योंकि तब तक उम्मीद ही आख़िरी चीज़ बची होती है।
जो ख़ुद फ़ोन करके, पहले पैसे लेकर, वापसी की गारंटी दे — वह ठग है। कोई असली वकील, कोई नियामक, कोई पुलिस अधिकारी ऐसा नहीं करता। 1930 और cybercrime.gov.in निःशुल्क हैं।
यह कैसे चलता है
- ठगी के कुछ दिन या हफ़्ते बाद फ़ोन, WhatsApp, Telegram या ईमेल आता है — "हमने आपका मामला देखा है, पैसा वापस दिला सकते हैं।"
- वे कुछ ऐसा बताते हैं जो सच लगे — आपकी रकम, app का नाम, तारीख़। यह जानकारी उन्हें उसी जगह से मिली है जहाँ पहली ठगी हुई थी।
- फिर अग्रिम फ़ीस माँगी जाती है — "processing", "legal", "tax", या "escrow खाते में जमा कीजिए, वहीं से रिलीज़ होगा।"
- नक़ली काग़ज़ दिखाए जाते हैं — पंजीकरण संख्या, अदालत का आदेश, नियामक या पुलिस जैसा दिखने वाला ईमेल पता।
- कभी-कभी आपके कंप्यूटर या फ़ोन का remote access माँगा जाता है — "बस खाता जाँचना है।" वहीं से बाक़ी पैसा भी चला जाता है।
- पैसा दे दिया तो नई देरी और नई फ़ीस निकल आती है। मना किया तो क़ानूनी कार्रवाई की धमकी।
हमारे बारे में साफ़ बात
यह मंच आपसे कभी कोई फ़ीस नहीं माँगेगा — न शिकायत दर्ज करने की, न "आगे बढ़ाने" की, न किसी और नाम से। हम आपका पैसा वापस दिलाने का दावा भी नहीं करते; हम सिर्फ़ गवाही एक जगह इकट्ठा करते हैं। अगर कोई हमारा नाम लेकर पैसे माँगे, तो वह हम नहीं हैं — हमें बताइए।
अगर आपके साथ यह हो चुका है
तो उसे भी अपनी शिकायत में लिखिए। यह दूसरी लहर कहीं दर्ज नहीं होती, इसलिए किसी को इसका आकार पता ही नहीं चलता। आपका लिखा हुआ ही उसे दिखाएगा।