साइबर अपराध हेल्पलाइन (भारत): 1930 · cybercrime.gov.in 100% निःशुल्क · निजी जानकारी कभी सार्वजनिक नहीं
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कैसे काम करता है

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चार आसान क़दम — और आपका मामला हमारे रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।

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सिर्फ़ नाम, ईमेल और पासवर्ड। एक मिनट का काम।

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कितना नुकसान हुआ, कब जुड़े, किसने प्रेरित किया — पूरा विवरण दें।

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स्क्रीनशॉट, पेमेंट रसीद, चैट — जो भी आपके पास है।

हम संपर्क करेंगे

आपके मामले की समीक्षा करके हम आपसे सीधे संपर्क करेंगे और आगे की राह बताएँगे।

आपका डेटा कैसे सुरक्षित रहता है

  • ईमेल, फ़ोन नंबर, खाता ID और निजी नोट डेटाबेस में AES-256 एन्क्रिप्शन के साथ रखे जाते हैं।
  • सार्वजनिक पन्नों पर सिर्फ़ आपकी आपबीती और छोटा किया हुआ नाम दिखता है — बाक़ी कुछ नहीं।
  • सबूत की फ़ाइलें वेब सर्वर की सार्वजनिक जगह से बाहर रखी जाती हैं; कोई लिंक अंदाज़ा लगाकर उन्हें नहीं खोल सकता।
  • पासवर्ड एकतरफ़ा हैश किए जाते हैं — हम भी उन्हें पढ़ नहीं सकते।
हम "पैसा वापस दिलाने" की कोई गारंटी नहीं देते और न ही इसके लिए कोई शुल्क लेते हैं। अगर कोई हमारे नाम पर पैसा माँगे तो वह धोखेबाज़ है — तुरंत हमें बताएँ।

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हमारे बाक़ी मंच

ठगी अलग-अलग नामों से होती है, इसलिए हर एक के लिए अलग जगह बनाई है — ताकि पीड़ित को अपनी बात कहने की सही जगह मिले।

तीनों मंच एक ही टीम चलाती है। हम यह छिपाते नहीं — इसीलिए यहाँ लिखा है।